तुम क्या लगाओगे हमारी , वफ़ा की कीमत का अंदाजा...!! हमारा तो नाम और शख्शियत दोनो अनमोल है...!!
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पढ़ रहा हूँ मै.. इश्क़ की किताब ऐ दोस्तों, ग़र बन गया वकील तो.. बेवफाओं की खैर नही!
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औक़ात नहीं थी जमाने की जो मेरी कीमत लगा सके, कबख़्त इश्क में क्या गिरे मुफ़्त में नीलाम हो गए। -- undefined
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